विक्रम और बेताल , सुंदरी कीसे मिलेगी?
विक्रम और बेताल , सुंदरी कीसे मिलेगी?
राजा विक्रम दूसरी बार उस अंधेरी रात मे बेताल को लेकर योगी के पास लाने निकला ,मायावी बेताल ने फिरसे विक्रम को शर्त दिलाई की,अगर रास्ते मे तूम कूछभी बोले तो मै भाग जाउंगा, बेताल की फिरसे वही शर्त मानकर विक्रम अपने कंधेपर बेताल को उठाकर चल रहे थे,
बेताल ने दूसरी कहानी सूनानी शूरू की, यमूना नदी किनारे एक ब्राह्मण रहता था वह स्थान गणाधिप राजा के राज्य के धर्मस्थान नामक ग्राम मे आता था,ब्राह्मण की एक कन्या थी जिसका नाम मालती था, जो बहूत ही सुंदर थी
अपनी बेटी की शादी करने हेतू ब्राह्मण एक वर की तलाष मे था, साथ ही उसकी बिवी और लडका भी ,मालती के लिए अच्छे वर की आशा लिए बैठे थे.
एक बार एक ब्राह्मण यूवक उनके घर आया तो ब्राह्मण कीसी शादी मे गए हूये थे,ब्राह्मण का लडका पढाई के कारण बाहर था तो घरपर मालती की मा ने उस लडकेके आचार विचार देख मालती की शादी उसके साथ करनेका वादा किया, जिस शादी मे ब्राह्मण गया था वहा भी एक अच्छा लडका देख ब्राह्मण ने उसे अपनी बेटी ब्याहनेका वादा किया, तिसरी तरफ ब्राह्मण के लडके ने भी एक गूनी लडके से मालती की शादी का वादा किया.
अब शादी करनेके लिए तैयार तीनो लडके जब ब्राह्मण के घर इकठ्ठा हूये तो ब्राह्मण परेशान हूआ की,अब मालती की शादी तीनो लडकोमेसे कीसके साथ की जाए.
परंतू दैवयोग से उसी समय साप के काटनेसे मालती मर गयी मालतीसे शादी करनेके इच्छुक तीनो लडकोने मालतीको बचानेकी बहूतकोषिशे की पर कुछ न हुवा.
मालती को जब स्मशान ले जाया गया तो, उसके बाद इन लडकोमेसे पहले ने मालती की हड्डीया चूनली और उन्हे लेकर वह फकीर बन भटकता रहा,दूसरे लडके ने मालती की राख की गठरि बांधी और वही झोपडी बनाकर रहने लगा, तो तिसरा भी योगी बनकर भटकता रहा.
तिसरा लडका घुमते घुमते जब एकबार भोजनके लिये शाम के समय एक ब्राह्मण के घर रुका था तो भोजन करते वक्त ब्राम्हण के लडके का शव कुछ सैनिक घर ले आये,वह ब्राम्हण का लडका राजा के यहा सैनिक हूआ करता था और कीसी कारण वश वह मर चुका था,उसे जब घर लाया गया तो ब्राह्मण की पत्नी और परिवारवाले रोने लगे ,आलाप करने लगे,परंतू ब्राम्हण ने कहा की आलाप करने की कोई जरुरत नही मै उसे अभी जिन्दा कर दुंगा,ब्राह्मण ने अपने पुर्वजोने दी एक पोथी पुस्तिका निकाली जो घरके देवालय मे थी और उसमेसे संजीवनी मंत्र पढना शूरू किया तो वह मरा हूआ लडका जिंदा हो गया, वरिवार वाले आनंदीत हूये.
योगी बने तिसरे लडके ने रात के समय जब ब्राह्मण के घर सारे लोग सो रहे थे, तो उसने वह पोथी चूरालीयी और वहा से भाग गया, उसने अपनी आखोसे जब मरा हूआ लडका इस पोथी के मंत्र से जिंदा होता देखा था ,तो वह पोथी लेकर जहा मालती को जलाया गया था वहा आया, तो वहापर पहलेवाले दो लडके कूछ बाते कर रहे थे तो इसने उन दोनो को बताया की मै अब मालती को जिंदा कर सकता हू,तो पहले लडके ने हड्डीया छोडी, दूसरे ने राख की गठरि छोडी और तिसरे ने पोथी पढी तो मालती जिंदा हो गयी. अब तिनो लडके आपसमे मालती पर अपना अपना हक जताने लगे, पहलेने कहा मैने आजतक हड्डीया संभाली, दूसरे ने कहा मै राख को बांधकर यही रूका रहा तो तिसरे लडके ने कहा की मालती को मैने जिंदा किया है.
यह कहानी सूनाकर बेताल ने राजा विक्रम से सवाल किया की अब तूम बताओ वह सुंदरी मालती तीनो लडकोमेसे कीसे मिलनी चाहीये.
राजा विक्रम बोल पडे की, पहले लडके ने हड्डीया संभाली यह बेटे के जैसा काम हूआ, तिसरे ने उसे जिंदा किया यह बापकी तरह काम हूआ तो जो दूसरा लडका जो राख बांधकर वही रूका रहा असल मे उसीने पती जैसा काम निष्ठापूर्न तरह से किया है तो मालती उसी को मिलनी चाहीये.
यह सूनकर बेताल ने राजा विक्रम की सोचकी सरहना की, और सचमे तूम अपनी प्रजा के न्याय देवता हो ऐसा कहकर बेताल फिर भाग गया,क्योंकी राजा विक्रम तो बोल पडे,उन्हे न बोलनेकी शर्त रखी गयी थी.





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