विक्रम- बेताल कहानी :प्रतिष्ठा हिन राजपुत्र
विक्रम- बेताल कहानी :प्रतिष्ठा हिन राजपुत्र
विक्रम राजा फिरसे बेताल को पेडपरसे निकाल कर अपने कन्धोपर लेकर उस भयानक जन्गलसे रातके समय मे चल रहे थे।तभी बेताल बोला,"विक्रम तुम अपना हठ अबतक न छोड़ सके।अब तुम्हें क्या समझाना तुम तो श्रेष्ठो मे गिनेजाते हो।पर कई बार श्रेष्ठोके भी कामोसे उन्हें हासिल इनामों से वन्चित रखा गया है!चलो इसकी एक कहानी ही सुन लो।
विजयनगर में जब शिवसेन का राज्य था तब उसे एकहि कन्या हुई जिसका नाम सूर्यमुखी था।वह युद्ध कला में बहुत ही निपुण थी।इस कारण राजाने सोचा की ,कुछ समय तक सूर्यमुखी को ही सिहासन पर बिठाया जाएं।इसके बाद ही उसका विवाह करेंगे।विक्रम बोला "नहीं! जब जयवन्त वहां बैठे अनेको पेच सीखता रहा , यह बात सूर्यमुखी जानचुकि थी ।वही बात जयवन्त भी समझ गया ।उन दोनों का रिश्ता गुरु शिष्य का हुआ। |
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लेबल: कथाए, कहहानी, पौराणिक, विक्रम और बेताल, HINDI STORY, Vikram betal
Arjun Dhotre द्वारा पोस्ट केलेले @ एप्रिल ०८, २०१९
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